भिंडी की खेती (Okra Cultivation): भिंडी की मांग बाजारों में सालों भर रहती है ऐसे में अगर आप किसान है और भिंडी का खेती बढ़िया तरीके से करके पैसा कमाना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है। इस आर्टिकल में मैं भिंडी की खेती करने का पूरा प्रोसेस आपको बताने वाला हूं। जिसमें आप भिंडी की खेती के लिए खेत का तैयार करना, उर्वरकों का उपयोग, बीजों की रोपाई तथा सिंचाई के अलावा इससे जुड़ी अन्य सभी जानकारी को इस आर्टिकल के माध्यम से आपको बताया जाएगा।
भिंडी की खेती करने के लिए जलवायु और मिट्टी
भिंडी का खेती (Okra Cultivation) करने के लिए किसानों को सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि यह कि जलवायु और किस प्रकार की मिट्टी में होता है। तो यहां पर मैं आपको भिंडी के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी के बारे में सभी जानकारी दूंगा।
भिंडी गम और आदर जलवायु की फसल है और इसके लिए 20 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस तक तापमान की आवश्यकता होती है। अगर आप इसे ठंड में उगते हैं तो इसकी वृद्धि कम होती है और इस पाला से नुकसान भी हो सकता है।
ऐसे तो भिंडी की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जाती है लेकिन किसानों को उचित भूमि का चयन करना चाहिए जिससे पैदावार अच्छा हो। अगर उचित मिट्टी की बात करें तो मिट्टी का पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि खेत में पानी नहीं लगना चाहिए नहीं तो जड़ खराब हो सकता है। अगर किसी कारणवश पानी लग भी जाए तो उसे निष्कासन का बेहतर प्रबंध करना चाहिए।

उन्नत किस्म के भिंडी के बीजों का चयन
हम सभी जानते हैं कि किसी प्रकार की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज बीजों का बेहतर किस्म का चयन होता है। अगर आप किसी कारण बस बीजों का चयन करने में चूक जाते हैं तो फसल अच्छा नहीं हो पाएगा। इसीलिए सबसे पहले उन्नत किस्म के भिंडी के बीज का चयन करना होगा जिससे पैदावार बेहतर हो और आपको ज्यादा फायदा हो। इसके अलावा बाजार में उसके कलर पर भी ज्यादा आकर्षक देखने को मिलता है। इसलिए जी कलर का मांग आपके बाजार में ज्यादा हो उसी कलर के उत्पादक वाला बीज बाजार से खरीदें।
आज के इस डेवलप्ड दुनिया में हाइब्रिड बीजों से अधिक उपज प्राप्त किया जा रहा है। हाइब्रिड बीज कम समय में तैयार भी हो जाता है और अच्छी पैदावार भी देता है। अगर आप बड़े स्तर पर खेती कर रहे हैं तो आपके लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण होने वाला है। इसीलिए आप चाहे तो हाइब्रिड भिंडी की खेती भी कर सकते हैं। अगर आप बीजों के बारे में और भी अधिक जानकारी लेना चाहते हैं तो आप अपने ग्रामीण कृषि सलाहकार से अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ग्रामीण कृषि सलाहकार के पास आपके गांव की सभी जानकारी होती है इसलिए वे आपको बेहतर सुझाव देते हैं।
भिंडी की खती (Okra Cultivation) के लिए खेत की तैयारी
भिंडी की खेती करने के लिए खेतों को अच्छी तरह से दो-तीन बार ट्रैक्टर से जुताई करनी चाहिए। खेतों की जुताई से पहले आप उसमें सड़ी हुई गोबर डाल सकते हैं। सड़ी हुई गोबर खेतों में डालने से खेतों की उर्वन शक्ति बनी रहती है और पैदावार भी अच्छा होता है और आपको और अन्य उर्वरक कम डालने की आवश्यकता होती है।
भिंडी की बुवाई का उचित समय
भिंडी बाजार में सालों का उपलब्ध होती है लेकिन अधिक उत्पादन लिए आपको निर्धारित समय के अंदर ही खेतों में लगाना अच्छा होता है। भिंडी की खेती आमतौर से साल भर में दो बार होती है। पहले गर्मी के मौसम में फरवरी से मार्च के बीच इस लगाया जाता है और दूसरा बरसात की फसल जो जून से जुलाई के महीने में लगाया जाता है।
बीजों की मात्रा
भिंडी की खेती करते समय किसानों के मन में यह सवाल हमेशा घूमता रहता है कि कितना बीज का उपयोग कितने जगह में करना चाहिए। तो हम आपको बता दे कि लगभग 8 से 10 किलो बीज प्रति हेक्टेयर का उपयोग किया जाता है। बीजों के साइज और खतरों के बीच की दूरी के अनुसार थोड़ा कम या अधिक बीजों का उपयोग हो सकता है। आप बीज के दुकानदार से या बीज के पैकेट पर लिखे हुए जानकारी के माध्यम से भी यह जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
भिंडी की खेती के लिए खाद और उर्वरक का उपयोग
किसी प्रकार के फसल को यूपी जाने के लिए उचित पोषण की आवश्यकता होती है। ठीक उसी प्रकार भिंडी की फसल को अच्छी तरीके से यूपी जाने के लिए उसमें भी खाद और उर्वरक की आवश्यकता होती है। बेहतर उपज के लिए गोबर खाद 15 से 20 टन प्रतिहेक्टर, नाइट्रोजन उर्वरक 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, फास्फोरस उर्वरक 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर और पोटाश उर्वरक 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से खेतों में डालना चाहिए और खेतों को अच्छी तरीके से जुटाए करना चाहिए।
समय पर सिंचाई
खेतों में बीज लगाने के बाद जब बी निकल आए उसके 15 से 20 दिन के बाद सिंचाई करें। गर्मी के दिनों में 4 से 5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई की आवश्यकता होती है। इस बात का हमेशा ध्यान रखें की खेत में अत्यधिक पानी का जमाव नहीं होना चाहिए। अगर किसी कारणवश पानी का जमाव अधिक होता है तो भिंडी के पौधों की वृद्धि रुक जाती है।
भिंडी के खेत से खरपतवार को निकालना
जैसे ही हम खेतों में सिंचाई कर देते हैं उसके बाद अगला कदम यह होता है कि उसमें खरपतवार को सही तरीके से हटा देना। खरपतवार को सही समय से हटाने पर भिंडी के पौधों की वृद्धि अच्छे तरीके से हो पाती है। पहली बार खेतों से खरपतवार निकालने का कार्य 15 से 20 दिन पर और दूसरी बार 30 से 40 दिनों के अंदर की जानी चाहिए जिससे पौधों के वृद्धि अच्छे तरीके से हो पाती है। अगर आप अधिक मात्रा में खेती कर रहे हैं तो आप खरपतवार नासिक अभी उपयोग कर सकते हैं।
भिंडी को तोड़ना और बाजारों में बचना
जैसे ही आपका भिंडी का पौधा से भिंडी तैयार हो जाता है तो आपको समय रहते उसे तोड़ना पड़ता है और बाजार तक पहुंचाना पड़ता है। जब आप बाजार तक उसे ले जाते हैं उसके बाद आप उसे आप खुद से बेच सकते हैं या आपके बाजार में आए हुए प्रकार के माध्यम से आप उसे बेच सकते हैं। अगर आपने भिंडी को उपजाने से संबंधित सभी जानकारी का ध्यान रखा है तो आप लगभग 100 कुंटल/ हेक्टेयर भिंडी का उत्पादन कर पाएंगे।
ऊपर हमने जितनी भी जानकारियां बताया है आप चाहे तो यूट्यूब वीडियो के माध्यम से भी जान सकते हैं जिसका लिंक आपको नीचे मिल जाएगा।
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